বালা-মুছীবত থেকে পরিত্রাণের উপায় সমূহ - Avas Multimedia
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বালা-মুছীবত থেকে পরিত্রাণের উপায় সমূহ - Avas Multimedia
শুক্রবার, ২২ সেপ্টেম্বর ২০২৩, ০৬:০২ অপরাহ্ন
শিরোনাম :
ঈদে মীলাদুন্নবী (সাঃ) একটি পর্যালোচনা মুহাররম ও আশূরা : করণীয় ও বর্জনীয় ইসলামে বিয়েতে উকিল দেওয়া কি জায়েজ আছে? আর তাদেরকে উকিল বাবা বা মা বলার বিধান কী? সমাজে প্রচলিত কিছু শিরক -নূরজাহান বিনতে আব্দুল মজীদ পবিত্র মাহে রমজানের শিক্ষা ও আমল রামাযানের শেষ দশক, লাইলাতুল কদর ও ইতিকাফ সদাকাতুল ফিতর না দেয়া পর্যন্ত রমযানের রোযা উত্তোলন করা হয় না, এ হাদিসটি কি সহিহ? ‘সুরত’ শব্দের অর্থ: বিতর্ক এবং সমাধান এক মেয়েকে বিয়ে করার পর একটি বাচ্চাও ভূমিষ্ঠ হয়েছে। তারপর জানা গেছে, সে তার দুধবোন! এ ক্ষেত্রে ইসলামের বিধান কী? দিনাজপুর কোতয়ালী থানায় কলেজ ছাত্র শাহরিন আলম বিপুল হত্যাকান্ডে ৪ জন গ্রেফতার

বালা-মুছীবত থেকে পরিত্রাণের উপায় সমূহ

  • প্রকাশের সময়ঃ রবিবার, ২১ ফেব্রুয়ারী, ২০২১
  • ১৬৫ বার দেখেছে
🕋 মহান আল্লাহ পৃথিবীতে মানুষকে পাঠিয়েছেন তাঁর প্রতিনিধি হিসাবে। সুতরাং মানুষ আল্লাহর আদেশ-নিষেধ মেনে চলবে, এটা তার জন্য ফরয কর্তব্য।
কিন্তু মানুষ বিভিন্ন সময়ে আল্লাহর নির্দেশ অমান্য করে, তাঁর অবাধ্য হয়। সে আল্লাহর শাস্তির কথা ভুলে গিয়ে ধরাকে সরা জ্ঞান করে।
স্রষ্টার প্রতি তার দায়িত্ব-কর্তব্য ভুলে গিয়ে নিজেকে পৃথিবীতে শক্তিধর হিসাবে যাহির করার চেষ্টা করে। আর এই স্পর্ধা থেকে নানা অনাচার-পাপাচার করে পৃথিবীকে কলুষিত করে তোলে।
ফলে তাদের উপরে নেমে আসে আল্লাহর আযাব-গযব হিসাবে নানা ধরনের বালা-মুছীবত। নিম্নে এসব বালা-মুছীবত থেকে পরিত্রাণের উপায় সম্পর্কে নাতিদীর্ঘ আলোচনা পেশ করা হ’ল।-

🕋 বালা-মুছীবতের কারণ সমূহ : 🕋

বিভিন্ন কারণে মানুষের উপরে বালা-মুছীবত আপতিত হয়। তন্মধ্যে আল্লাহর সাথে শিরক ও কুফরী, মানুষের উপরে যুলুম-নির্যাতন করা, অধিক পাপাচার করা ও সৎকাজের আদেশ কম করা, অবাধ্যতা ও অহংকার করা, মিথ্যাচার করা, আল্লাহ প্রদত্ত নে‘মতের অস্বীকৃতি, দুনিয়াবী বিষয়ে প্রতিযোগিতা ও কৃপণতা, রাসূল (ছাঃ)-কে মিথ্যাপ্রতিপন্ন করা, ছালাত পরিত্যাগ করা, যাকাত অস্বীকার করা, জিহাদ পরিত্যাগ করা, অশ্লীলতার প্রসার ঘটানো, আল্লাহর সাথে কৃত অঙ্গীকার ভঙ্গ করা, সূদ-ঘুষ আদান-প্রদান করা বা হারাম ভক্ষণ করা, আল্লাহর নাযিলকৃত বিধান দ্বারা ফায়ছালা না করা ইত্যাদি কারণে মানুষের উপরে বালা-মুছীবত নেমে আসে।

🕋 বালা-মুছীবত থেকে পরিত্রাণের উপায় সমূহ 🕋

বালা-মুছীবত থেকে পরিত্রাণের উপায়গুলিকে দু’ভাগে ভাগ করা যায়।
ক. বালা-মুছীবত নাযিল হওয়ার পূর্বে করণীয়
খ. বালা-মুছীবত নাযিল হওয়ার পরে করণীয়।
ক. বালা-মুছীবত নাযিল হওয়ার পূর্বে করণীয় :
মানুষ আল্লাহর বিধান মেনে চললে তাদের উপরে আল্লাহর আযাব-গযব হিসাবে বালা-মুছীবত নেমে আসবে না। বালা-মুছীবত যাতে না আসে সেজন্য কিছু করণীয় আছে। সেগুলো নিম্নে উল্লেখ করা হ’ল।-

🕋 ১. আল্লাহর আদেশ-নিষেধ মেনে চলা :

আল্লাহর আদেশ প্রতিপালন করা এবং তাঁর নিষিদ্ধ বিষয় পরিত্যাগ করা বালা-মুছীবত থেকে মুক্তি লাভের অন্যতম উপায়। রাসূলুল্লাহ (ছাঃ) ইবনু আববাস (রাঃ)-কে বলেন,
يَا غُلاَمُ إِنِّى أُعَلِّمُكَ كَلِمَاتٍ احْفَظِ اللهَ يَحْفَظْكَ احْفَظِ اللهَ تَجِدْهُ تُجَاهَكَ إِذَا سَأَلْتَ فَاسْأَلِ اللهَ وَإِذَا اسْتَعَنْتَ فَاسْتَعِنْ بِاللهِ وَاعْلَمْ أَنَّ الأُمَّةَ لَوِ اجْتَمَعَتْ عَلَى أَنْ يَنْفَعُوكَ بِشَىْءٍ لَمْ يَنْفَعُوكَ إِلاَّ بِشَىْءٍ قَدْ كَتَبَهُ اللهُ لَكَ وَلَوِ اجْتَمَعُوا عَلَى أَنْ يَضُرُّوْكَ بِشَىْءٍ لَمْ يَضُرُّوْكَ إِلاَّ بِشَىْءٍ قَدْ كَتَبَهُ اللهُ عَلَيْكَ رُفِعَتِ الأَقْلاَمُ وَجَفَّتِ الصُّحُفُ.
‘হে তরুণ! আমি তোমাকে কয়েকটি কথা শিখিয়ে দিচ্ছি- তুমি আল্লাহ্ তা’আলার (বিধি-নিষেধের) রক্ষা করবে, আল্লাহ তা‘আলা তোমাকে রক্ষা করবেন। তুমি আল্লাহ্ তা‘আলার বিধানের প্রতি লক্ষ্য রাখবে, আল্লাহ্ তা‘আলাকে তুমি তোমার সামনে পাবে। তোমার কোন কিছু চাওয়ার প্রয়োজন হ’লে আল্লাহ তা‘আলার নিকট চাও, আর সাহায্য প্রার্থনা করতে হ’লে আল্লাহ্ তা‘আলার নিকটেই কর। আর জেনে রাখো, যদি সকল উম্মতও তোমার কোন উপকারের উদ্দেশ্যে ঐক্যবদ্ধ হয় তাহ’লে তারা তোমার ততটুকু উপকারই করতে পারবে, যতটুকু আল্লাহ তা‘আলা তোমার জন্যে লিখে রেখেছেন। অপরদিকে যদি তারা সকলে তোমার ক্ষতি করার জন্য সমবেত হয়, তাহ’লে তারা তোমার ততটুকু ক্ষতিই করতে সক্ষম হবে, যতটুকু আল্লাহ্ তা‘আলা তোমার তাক্বদীরে লিখে রেখেছেন। কলম তুলে নেয়া হয়েছে এবং লিখিত কাগজসমূহও শুকিয়ে গেছে।
অন্য বর্ণনায় রয়েছে,
احْفَظِ اللهَ يَحْفَظْكَ وَاحْفَظِ اللهَ تَجِدْهُ أَمَامَكَ، وَتَعَرَّفْ اِلَى الله فِي الرَّخَاءِ، يَعْرِفْكَ فِي الشِّدَّةِ،
‘তুমি আল্লাহর বিধান হেফাযত কর আল্লাহ তোমাকে রক্ষা করবেন। তুমি আল্লাহর বিধান হেফাযত কর আল্লাহকে তোমার সামনে পাবে। তুমি সুখের সময় আল্লাহকে স্মরণে রাখ, বিপদের সময় আল্লাহ তোমাকে স্মরণে রাখবেন’।[2]

🕋 ২. উত্তম চরিত্রের অধিকারী হওয়া :

সচ্চরিত্র মানুষকে ধ্বংসের কবল থেকে রক্ষা করতে পারে। যেমন হাদীছে উল্লেখিত হয়েছে। আয়েশা (রাঃ) হ’তে বর্ণিত তিনি বলেন,
فَرَجَعَ بِهَا رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم يَرْجُفُ فُؤَادُهُ، فَدَخَلَ عَلَى خَدِيْجَةَ بِنْتِ خُوَيْلِدٍ رضى الله عنها فَقَالَ زَمِّلُوْنِى زَمِّلُوْنِى فَزَمَّلُوْهُ حَتَّى ذَهَبَ عَنْهُ الرَّوْعُ، فَقَالَ لِخَدِيجَةَ وَأَخْبَرَهَا الْخَبَرَ لَقَدْ خَشِيْتُ عَلَى نَفْسِى فَقَالَتْ خَدِيجَةُ كَلاَّ وَاللهِ مَا يُخْزِيْكَ اللهُ أَبَدًا، إِنَّكَ لَتَصِلُ الرَّحِمَ، وَتَحْمِلُ الْكَلَّ، وَتَكْسِبُ الْمَعْدُوْمَ، وَتَقْرِى الضَّيْفَ، وَتُعِيْنُ عَلَى نَوَائِبِ الْحَقِّ.
‘অতঃপর এ আয়াত নিয়ে আল্লাহর রাসূল (ছাঃ) প্রত্যাবর্তন করলেন। তাঁর হৃদয় তখন কাঁপছিল। তিনি খাদীজা বিনতু খুওয়ায়লিদের নিকটে এসে বললেন, আমাকে চাদর দ্বারা আবৃত কর, আমাকে চাদর দ্বারা আবৃত কর। অতঃপর তাঁকে চাদর দ্বারা আবৃত করা হল। এমনকি তাঁর শংকা দূর হ’ল। তখন তিনি খাদীজা (রাঃ)-এর নিকটে ঘটনা জানিয়ে বললেন, আমি আমার নিজেকে নিয়ে শংকা বোধ করছি। খাদীজা (রাঃ) বললেন, ‘কখনোই না। আল্লাহর কসম! তিনি কখনোই আপনাকে অপদস্থ করবেন না। আপনি আত্মীয়দের সঙ্গে সদাচরণ করেন, দুস্থদের বোঝা বহন করেন, নিঃস্বদের কর্মসংস্থান করেন, অতিথিদের আপ্যায়ন করেন এবং বিপদগ্রস্তকে সাহায্য করেন’।
ইমাম নববী (রহঃ) বলেন
,قَالَ الْعُلَمَاءُ رَضِيَ اللهُ عَنْهُمْ مَعْنَى كَلَامِ خَدِيجَةَ رَضِيَ اللهُ عَنْهَا إِنَّكَ لَا يُصِيبُكَ مَكْرُوهٌ لِمَا جَعَلَ اللهُ فِيكَ مِنْ مَكَارِمِ الْأَخْلَاقِ وَكَرَمِ الشَّمَائِلِ وَذَكَرَتْ ضُرُوبًا مِنْ ذَلِكَ وَفِي هَذَا دَلَالَةٌ عَلَى أَنَّ مَكَارِمَ الْأَخْلَاقِ وَخِصَالَ الْخَيْرِ سَبَبُ السَّلَامَةِ مِنْ مَصَارِعِ السُّوْءِ،
‘বিদ্বানগণ বলেন, খাদীজা (রাঃ)-এর কথার অর্থ হচ্ছে, আপনার উপরে কোন কষ্ট-ক্লেশ বা অপসন্দনীয় কিছু আপতিত হবে না। কেননা আল্লাহ আপনার মধ্যে উত্তম চারিত্রিক বৈশিষ্ট্য ও উত্তম গুণাবলী দান করেছেন। যেগুলি তিনি উদাহরণ স্বরূপ উল্লেখ করেছেন। এর দ্বারা প্রতীয়মান হয় যে, উত্তম চরিত্র ও সৎ স্বভাব ধ্বংস-যজ্ঞ বা বিনাশ হওয়া থেকে রক্ষা করে’।
ইমাম কিরমানী (রহঃ) বলেন,
وفيه أن خصال الخير سببٌ للسلامة من مَصارِع السوء، والمكارم سببٌ لدفع المكاره،
‘আর এতে (খাদীজা রাঃ-এর বক্তব্যে) রয়েছে যে, উত্তম স্বভাব-চরিত্র ধ্বংস থেকে নিরাপত্তা লাভের উপায়। সচ্চরিত্র কষ্ট-ক্লেশ বা অপসন্দনীয় বিষয় প্রতিরোধের উপায়’।
আল্লামা বদরুদ্দীন আইনী (রহঃ) বলেন
,فِيهِ أَنَّ مَكَارِم الْأَخْلَاق وخصال الْخَيْر سَبَب للسلامة من مصَارِع الشَّرّ والمكاره فَمن كثر خَيره حسنت عاقبته ورجى لَهُ سَلامَة الدِّيْن وَالدُّنْيَا،
‘এতে (খাদীজা রাঃ-এর বক্তব্যে) রয়েছে যে, উত্তম স্বভাব-চরিত্র ধ্বংস ও কষ্ট-ক্লেশ থেকে নিরাপত্তা লাভের মাধ্যম। অতএব যার সৎকর্ম বেশী তার পরিণতি সুন্দর হবে। আর তার জন্য দ্বীন ও দুনিয়ার নিরাপত্তার আশা করা যায়’।

🕋 ৩. তওবা ও ইস্তেগফার করা :

পরীক্ষা ও বিপদে পতিত হওয়া গোনাহ থেকে মুক্ত হওয়ার মাধ্যম। তবে শর্ত হ’ল ঐ পরীক্ষা ও বিপদে ধৈর্য ধারণ করতে হবে এবং তার জন্য ছওয়াবের আশা পোষণ করতে হবে। সেই সাথে আল্লাহর দিকে প্রত্যাবর্তন করতে হবে এবং তাঁর নিকটে তওবা করতে হবে। কেননা কুরআন ও হাদীছ প্রমাণ করে যে, মানুষের গোনাহের কারণেই বিপদ-মুছীবত আপতিত হয় এবং তওবা ব্যতীত তা দূরীভূত হয় না। সুতরাং মানুষকে বেশী বেশী তওবা করতে হবে। দুনিয়াতে আমরা যে বিপদে-আপদে পতিত হই, তা থেকে পরিত্রাণের জন্য বা সেগুলো হালকা হওয়ার জন্য মুছীবত দূরীভূত হওয়ার উপায়সমূহ অবলম্বন করা উচিত।
আল্লাহ বান্দাকে তওবার নির্দেশ দিয়ে বলেন
,يَا أَيُّهَا الَّذِيْنَ آمَنُوْا تُوْبُوْا إِلَى اللهِ تَوْبَةً نَّصُوْحاً-
‘হে মুমিনগণ! তোমরা আল্লাহর নিকট খাঁটি তওবা কর’ (তাহরীম ৬৬/৮)।
অন্যত্র আল্লাহ বলেন,
وَاسْتَغْفِرُوْا رَبَّكُمْ ثُمَّ تُوْبُوْا إِلَيْهِ
‘তোমরা তোমাদের প্রতিপালকের নিকট গুনাহ মাফ চাও এবং তাঁর দিকে ফিরে এসো’ (হূদ ১১/৯০)।
অন্য আয়াতে আল্লাহ বলেন
, وَتُوْبُوْا إِلَى اللهِ جَمِيْعاً أَيُّهَا الْمُؤْمِنُوْنَ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُوْنَ
‘হে মুমিনগণ! তোমরা সকলে আল্লাহর নিকট তওবা কর, তাহ’লে তোমরা সফলকাম হবে’ (নূর ২৪/৩১)।
তিনি আরো বলেন
,وَمَا كَانَ اللهُ لِيُعَذِّبَهُمْ وَأَنْتَ فِيْهِمْ وَمَا كَانَ اللهُ مُعَذِّبَهُمْ وَهُمْ يَسْتَغْفِرُوْنَ-
‘অথচ আল্লাহ কখনো তাদের উপর শাস্তি নাযিল করবেন না যতক্ষণ তুমি (হে মুহাম্মাদ) তাদের মধ্যে অবস্থান করবে। আর আল্লাহ তাদেরকে শাস্তি দিবেন না যতক্ষণ তারা ক্ষমা প্রার্থনা করতে থাকবে’ (আনফাল ৮/৩৩)।
রাসূল (ছাঃ) আরো বলেন,
مَنْ لَزِمَ الاسْتِغْفَارَ جَعَلَ اللهُ لَهُ مِنْ كُلِّ ضِيْقٍ مَخْرَجاً، وَمِنْ كُلِّ هَمٍّ فَرَجاً، وَرَزَقَهُ مِنْ حَيْثُ لاَ يَحْتَسِبُ-
‘যে ব্যক্তি সর্বদা ক্ষমা চায়, আল্লাহ তা‘আলা তার জন্য প্রত্যেক সংকীর্ণতা হ’তে একটি পথ বের করে দেন এবং প্রত্যেক চিন্তা হ’তে তাকে মুক্তি দেন। আর তাকে রিযিক দান করেন এমন স্থান হ’তে যা সে কখনো কল্পনা করে না’।
রাসূল (ছাঃ) বলেন, ‘যে ব্যক্তি বলল,
أسْتَغْفِرُ اللهَ الَّذِيْ لاَ إلَهَ إلاَّ هُوَ الحَيُّ القَيُوْمُ وَأتُوْبُ إلَيْهِ، غُفِرَتْ ذُنُوْبُهُ، وإنْ كانَ قَدْ فَرَّ مِنَ الزَّحْفِ-
(আমি আল্লাহর নিকটে ক্ষমা চাই। যিনি ব্যতীত কোন মা‘বূদ নেই। যিনি চিরঞ্জীব চির প্রতিষ্ঠাতা এবং তাঁর নিকটে তওবাকারী) আল্লাহ তাকে ক্ষমা করে দিবেন যদিও সে জিহাদের মাঠ হ’তে পলায়ণ করে থাকে’।

🕋 ৪. তাক্বওয়া বা আল্লাহভীতি অর্জন করা :

তাক্বওয়া হচ্ছে সকল আমল সংশোধনের উপায়। আল্লাহ তা‘আলা বলেন
,يَا أَيُّهَا الَّذِيْنَ آمَنُوا اتَّقُوا اللهَ وَقُوْلُوْا قَوْلًا سَدِيْدًا، يُصْلِحْ لَكُمْ أَعْمَالَكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ذُنُوْبَكُمْ وَمَنْ يُطِعِ اللهَ وَرَسُوْلَهُ فَقَدْ فَازَ فَوْزًا عَظِيْمًا-
‘হে মুমিনগণ! তোমরা আল্লাহকে ভয় কর এবং সঠিক কথা বল। তাহ’লে তিনি তোমাদের কর্মসমূহকে সংশোধন করে দিবেন ও তোমাদের পাপ সমূহ ক্ষমা করবেন। আর যে ব্যক্তি আল্লাহ ও তাঁর রাসূলের আনুগত্য করে, সে ব্যক্তি মহা সাফল্য অর্জন করে’ (আহযাব ৩৩/৭০-৭১)।
মহান আল্লাহ বলেন,وَمَنْ يَّتَّقِ اللهَ يَجْعَلْ لَّهُ مَخْرَجًا، وَيَرْزُقْهُ مِنْ حَيْثُ لاَ يَحْتَسِبُ- ‘যে কেউ আল্লাহকে ভয় করে, আল্লাহ তার (মুক্তির) পথ করে দিবেন এবং তাকে তার ধারণাতীত উৎস হ’তে রিযক দান করবেন’ (তালাক ৬৫/২-৩)।
ইবনু আববাস (রাঃ) বলেন, এ আয়াতের অর্থ হচ্ছে আল্লাহ তাকে ইহকালীন ও পরকালীন সকল সমস্যা থেকে মুক্তি দিবেন।
আল্লাহভীতি অর্জন করলে দুনিয়াবী বালা-মুছীবত থেকে পরিত্রাণ পাওয়া যায়। ছামূদ সম্প্রদায়ের কথা উল্লেখ করে আল্লাহ বলেন,
وَأَمَّا ثَمُوْدُ فَهَدَيْنَاهُمْ فَاسْتَحَبُّوا الْعَمَى عَلَى الْهُدَى فَأَخَذَتْهُمْ صَاعِقَةُ الْعَذَابِ الْهُوْنِ بِمَا كَانُوْا يَكْسِبُوْنَ، وَنَجَّيْنَا الَّذِيْنَ آمَنُوْا وَكَانُوْا يَتَّقُوْنَ،
‘আর ছামূদ সম্প্রদায়ের ব্যাপার তো এই যে, আমরা তাদেরকে পথ-নির্দেশ করেছিলাম, কিন্তু তারা সৎপথের পরিবর্তে ভ্রান্তপথ অবলম্বন করেছিল। অতঃপর তাদেরকে লাঞ্ছনাদায়ক শাস্তি আঘাত হানল তাদের কৃতকর্মের পরিণাম স্বরূপ। আমরা উদ্ধার করলাম তাদেরকে যারা ঈমান এনেছিল এবং যারা তাক্বওয়া অবলম্বন করত’ (&হা-মীম আস-সাজদা ৪১/১৭-১৮)।
অর্থাৎ তাদের পরে উল্লিখিতদের কোন অনিষ্ট স্পর্শ করেনি এবং তারা কোন ক্ষতির শিকার হয়নি। বরং আল্লাহ তা‘আলা তাদেরকে তাদের নবী ছালেহ (আঃ)-এর সাথে রক্ষা করেছেন তাদের ঈমান ও আল্লাহভীতির কারণে।
আল্লাহ তা‘আলা বলেন,
وَإِنْ مِِّنْكُمْ إِلاَّ وَارِدُهَا كَانَ عَلَى رَبِّكَ حَتْمًا مَقْضِيًّا، ثُمَّ نُنَجِّي الَّذِيْنَ اتَّقَوْا وَنَذَرُ الظَّالِمِيْنَ فِيْهَا جِثِيًّا-
‘আর তোমাদের প্রত্যেকেই তা অতিক্রম করবে; এটা তোমার প্রতিপালকের অনিবার্য সিদ্ধান্ত। পরে আমি মুত্ত ক্বীদেরকে উদ্ধার করব এবং যালিমদেরকে সেথায় নতজানু অবস্থায় রেখে দেব’ (মারিয়াম ১৯/৭১-৭২)।

🕋 ৫. খাদ্য-পানীয়ের পাত্র সমূহ ঢেকে রাখা :

খাদ্য ও পানপাত্র সমূহ ঢেকে রাখার জন্য বিশেষভাবে নির্দেশ দেওয়া হয়েছে। অন্যথা এতে রোগজীবাণু প্রবেশ করতে পারে। রাসূল (ছাঃ) বলেন,
غَطُّوْا الإِنَاءَ وَأَوْكُوا السِّقَاءَ فَإِنَّ فِى السَّنَةِ لَيْلَةً يَنْزِلُ فِيْهَا وَبَاءٌ لاَ يَمُرُّ بِإِنَاءٍ لَيْسَ عَلَيْهِ غِطَاءٌ أَوْ سِقَاءٍ لَيْسَ عَلَيْهِ وِكَاءٌ إِلاَّ نَزَلَ فِيْهِ مِنْ ذَلِكَ الْوَبَاءِ. ‘
খাদ্য-পাত্র ঢেকে রাখো এবং মশক বন্ধ রাখো। কেননা বছরে এমন এক রাত্রি আছে, যে রাত্রে বিভিন্ন প্রকারের বালা-মুছীবত নাযিল হয়। ঐসব বালার গতিবিধি এমন সব পাত্রের দিকে হয় যা ঢাকা নয় এবং এমন পান-পাত্রের দিকে হয় যার মুখ বন্ধ নয়, ফলে তা তার মধ্যে প্রবেশ করে’।

🕋 ৬. বিভিন্ন দো‘আ করা :

বালা-মুছীবত থেকে পরিত্রাণের জন্য ঐসব নাযিল হওয়ার পূর্বে বিভিন্ন সময় ও ক্ষেত্রে পঠিতব্য নানা রকম দো‘আ রাসূল (ছাঃ) শিখিয়েছেন। সেগুলি নিয়মিত পাঠ করা। রাসূল (ছাঃ) বলেন
,إِنَّ الدُّعَاءَ يَنْفَعُ مِمَّا نَزَلَ وَمِمَّا لَمْ يَنْزِلْ فَعَلَيْكُمْ عِبَادَ اللهِ بِالدُّعَاءِ. ‘
যে বিপদ-আপদ এসেছে আর যা (এখনও) আসেনি তাতে দো‘আয় কল্যাণ হয়। অতএব হে আল্লাহর বান্দাগণ! তোমরা দো‘আকে আবশ্যিক করে নাও’।
সকাল-সন্ধ্যায় পঠিতব্য দো‘আ : রাসূল (ছাঃ) বলেন
,مَنْ قَالَ بِسْمِ اللهِ الَّذِى لاَ يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَىْءٌ فِى الأَرْضِ وَلاَ فِى السَّمَاءِ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ ثَلاَثَ مَرَّاتٍ لَمْ تُصِبْهُ فَجْأَةُ بَلاَءٍ حَتَّى يُصْبِحَ وَمَنْ قَالَهَا حِينَ يُصْبِحُ ثَلاَثَ مَرَّاتٍ لَمْ تُصِبْهُ فَجْأَةُ بَلاَءٍ حَتَّى يُمْسِىَ.
‘যে ব্যক্তি সন্ধ্যায় তিনবার বলবে, অর্থ : ‘আল্লাহর নামে যাঁর নামের বরকতে আসমান ও যমীনের কোন বস্ত্তই ক্ষতি করতে পারে না, তিনি সর্বশ্রোতা ও মহাজ্ঞানী’ সকাল হওয়া পর্যন্ত তার প্রতি কোন আকস্মিক বিপদ আসবে না। আর যে তা সকালে তিনবার বলবে সন্ধ্যা পর্যন্ত তার উপর কোন আকস্মিক বিপদ আসবে না’।
দো‘আ ইউনুস বেশী বেশী পাঠ করা : মহান আল্লাহ বলেন,
وَذَا النُّونِ إِذْ ذَهَبَ مُغَاضِبًا فَظَنَّ أَنْ لَنْ نَقْدِرَ عَلَيْهِ فَنَادَى فِي الظُّلُمَاتِ أَنْ لاَ إِلَهَ إِلاَّ أَنْتَ سُبْحَانَكَ إِنِّيْ كُنْتُ مِنَ الظَّالِمِيْنَ، فَاسْتَجَبْنَا لَهُ وَنَجَّيْنَاهُ مِنَ الْغَمِّ وَكَذَلِكَ نُنْجِي الْمُؤْمِنِيْنَ،
‘আর স্মরণ কর মাছওয়ালা (ইউনুস)-এর কথা। যখন সে ক্রুদ্ধ অবস্থায় চলে গিয়েছিল এবং বিশ্বাসী ছিল যে, আমরা তার উপর কোনরূপ কষ্ট দানের সিদ্ধান্ত নেব না। অতঃপর সে (মাছের পেটে) ঘণ অন্ধকারের মধ্যে আহবান করল (হে আল্লাহ!) তুমি ব্যতীত কোন উপাস্য নেই। তুমি পবিত্র। আমি সীমালংঘণকারীদের অন্তর্ভুক্ত। অতঃপর আমরা তার আহবানে সাড়া দিলাম এবং তাকে দুশ্চিন্তা হ’তে মুক্ত করলাম। আর এভাবেই আমরা বিশ্বাসীদের মুক্তি দিয়ে থাকি’ (আম্বিয়া ২১/৮৭-৮৮)।
রাসূল (ছাঃ) বলেন,
دَعْوَةُ ذِى النُّوْنِ إِذْ دَعَا وَهُوَ فِىْ بَطْنِ الْحُوْتِ لاَ إِلَهَ إِلاَّ أَنْتَ سُبْحَانَكَ إِنِّى كُنْتُ مِنَ الظَّالِمِيْنَ. فَإِنَّهُ لَمْ يَدْعُ بِهَا رَجُلٌ مُسْلِمٌ فِىْ شَىْءٍ قَطُّ إِلاَّ اسْتَجَابَ اللهُ لَهُ.
‘যুন-নূন ইউনুস (আঃ) মাছের পেটে থাকাকালে যে দো‘আ করেছিলেন তা হ’ল- ‘তুমি ব্যতীত কোন মা‘বূদ নেই, তুমি অতি পবিত্র। আমি নিশ্চয়ই যালিমদের দলভুক্ত’ (আম্বিয়া ২১/৮৭)।
যে কোন মুসলিম কোন বিষয়ে কখনো এর মাধ্যমে দো‘আ করলে অবশ্যই আল্লাহ তা‘আলা তার দো‘আ কবুল করেন’।
সকাল-সন্ধ্যায় আল্লাহর কাছে আশ্রয় প্রার্থনার দো‘আ : আব্দুল্লাহ ইবনু ওমর (রাঃ) বলেন
,لَمْ يَكُنْ رَسُوْلُ اللهِ صلى الله عليه وسلم يَدَعُ هَؤُلاَءِ الدَّعَوَاتِ حِيْنَ يُصْبِحُ وَحِيْنَ يُمْسِى اللَّهُمَّ إِنِّى أَسْأَلُكَ الْعَافِيَةَ فِى الدُّنْيَا وَالآخِرَةِ اللَّهُمَّ إِنِّى أَسْأَلُكَ الْعَفْوَ وَالْعَافِيَةَ فِىْ دِيْنِىْ وَدُنْيَاىَ وَأَهْلِى وَمَالِى اللَّهُمَّ اسْتُرْ عَوْرَاتِىْ وَآمِنْ رَوْعَاتِىْ اللَّهُمَّ احْفَظْنِى مِنْ بَيْنِ يَدَىَّ وَمِنْ خَلْفِىْ وَعَنْ يَمِيْنِىْ وَعَنْ شِمَالِىْ وَمِنْ فَوْقِى وَأَعُوْذُ بِعَظَمَتِكَ أَنْ أُغْتَالَ مِنْ تَحْتِىْ،
‘রাসূলুল্লাহ (ছাঃ) সকাল-সন্ধ্যায় এসব দো‘আ করা পরিত্যাগ করতেন না- ‘হে আল্লাহ! আমি তোমার নিকট দুনিয়া ও আখেরাতের নিরাপত্তা কামনা করছি। হে আল্লাহ! আমি তোমার নিকট আমার দ্বীন ও দুনিয়া, পরিবার ও সম্পদ বিষয়ে ক্ষমা ও নিরাপত্তা কামনা করছি। হে আল্লাহ! তুমি আমার গোপন ব্যাপারগুলো গোপন রাখো। ভয়-ভীতি থেকে আমাকে নিরাপত্তা দাও। হে আল্লাহ! তুমি আমাকে নিরাপদে রাখ, আমার সম্মুখের বিপদ হ’তে, পশ্চাতের বিপদ হ’তে, ডানের বিপদ হ’তে, বামের বিপদ হ’তে, আর ঊর্ধ্বদেশের গযব হ’তে। তোমার মহত্ত্বের দোহাই দিয়ে তোমার কাছে আশ্রয় প্রার্থনা করছি আমার নিম্নদেশ হ’তে আগত বিপদে আকস্মিক মৃত্যু হ’তে’।
আবূ হুরায়রাহ (রাঃ) হ’তে বর্ণিত, তিনি বলেন
, كَانَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم يَتَعَوَّذُ مِنْ جَهْدِ الْبَلاَءِ، وَدَرَكِ الشَّقَاءِ، وَسُوْءِ الْقَضَاءِ، وَشَمَاتَةِ الأَعْدَاءِ.
‘নবী করীম (ছাঃ) বালা-মুছীবতের কঠোরতা, দুর্ভাগ্যে পতিত হওয়া, ভাগ্যের অশুভ পরিণতি এবং দুশমনের আনন্দিত হওয়া থেকে আশ্রয় চাইতেন’।
বাড়ী থেকে বের হওয়ার সময় দো‘আ : রাসূল (ছাঃ) বলেন
,إِذَا خَرَجَ الرَّجُلُ مِنْ بَيْتِهِ فَقَالَ بِسْمِ اللهِ تَوَكَّلْتُ عَلَى اللهِ لاَ حَوْلَ وَلاَ قُوَّةَ إِلاَّ بِاللهِ قَالَ يُقَالُ حِينَئِذٍ هُدِيتَ وَكُفِيتَ وَوُقِيتَ فَتَتَنَحَّى لَهُ الشَّيَاطِينُ فَيَقُولُ لَهُ شَيْطَانٌ آخَرُ كَيْفَ لَكَ بِرَجُلٍ قَدْ هُدِىَ وَكُفِىَ وَوُقِىَ-
‘যখন কোন ব্যক্তি তার ঘর থেকে বের হওয়ার সময় বলবে, বিসমিল্লাহি তাওয়াক্কালতু ‘আলাল্লাহ, লা হাওলা ওয়ালা কুওয়াতা ইল্লা বিল্লাহ’ তখন তাকে বলা হয়, তুমি হেদায়াত প্রাপ্ত হয়েছ, রক্ষা পেয়েছ ও নিরাপত্তা লাভ করেছ। সুতরাং শয়তানরা তার থেকে দূর হয়ে যায় এবং অন্য এক শয়তান বলে, তুমি ঐ ব্যক্তিকে কি করতে পারবে, যাকে পথ দেখানো হয়েছে, নিরাপত্তা দেয়া হয়েছে এবং রক্ষা করা হয়েছে’।
খ. বালা-মুছীবত নাযিল হওয়ার পরে করণীয় :
বিপদাপদ ও বালা-মুছীবত নাযিল হ’লে কিছু করণীয় রয়েছে, যা করলে মানুষ ঐসব থেকে রক্ষা পেতে পারে। নিম্নে সে করণীয়গুলো উল্লেখ করা হ’ল।-

🕋 ১. বেশী বেশী ইবাদত করা :

বিপদ আসলে বেশী বেশী ইবাদত-বন্দেগী করা উচিত। যাতে আল্লাহর রহমত নাযিল হয় এবং তিনি দয়াপরবশ হয়ে আপতিত বিপদ থেকে মানুষকে রক্ষা করেন। রাসূল (ছাঃ) বলেন
,إِنَّ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ آيَتَانِ مِنْ آيَاتِ اللهِ، لاَ يَنْخَسِفَانِ لِمَوْتِ أَحَدٍ وَلاَ لِحَيَاتِهِ، فَإِذَا رَأَيْتُمْ ذَلِكَ فَادْعُوْا اللهَ وَكَبِّرُوْا، وَصَلُّوْا وَتَصَدَّقُوْا
. ‘সূর্য ও চন্দ্র আল্লাহর নিদর্শন সমূহের দু’টি নিদর্শন। কারো মৃত্যু বা জন্মের কারণে সূর্যগ্রহণ ও চন্দ্রগ্রহণ হয় না। কাজেই যখন তোমরা তা দেখবে তখন তোমরা আল্লাহর নিকট দো‘আ করবে। তাঁর মহত্ব ঘোষণা করবে এবং ছালাত আদায় করবে ও ছাদাক্বাহ করবে’।
হাফেয ইবনু হাজার আসক্বালানী (রহঃ) বলেন
,قَالَ الطِّيبِيُّ أُمِرُوْا بِاسْتِدْفَاعِ الْبَلاَءِ بِالذِّكْرِ وَالدُّعَاءِ وَالصَّلاَةِ وَالصَّدَقَةِ، ‘
ত্বীবী বলেন, বালা-মুছীবত প্রতিরোধের জন্য যিকর, দো‘আ, ছালাত ও ছাদাক্বার মাধ্যমে তা প্রতিরোধের নির্দেশ দেওয়া হয়েছে’।
হাফেয ইবনুল কায়্যিম (রহঃ) বলেন,
والنبي صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أمر بالكسوف بالصلاة والعتاقة والمبادرة إلى ذكر الله تعالى والصدقة، فإن هذه الأمور تدفع أسباب البلاء.
‘নবী করীম (ছাঃ) চন্দ্রগ্রহণের সময় ছালাত, দাসমুক্তি, বেশী বেশী যিকর ও দান-ছাদাক্বা করার নির্দেশ দিয়েছেন। কেননা এসব কাজ বালা-মুছীবত থেকে পরিত্রাণ লাভের মাধ্যম’।

🕋 ক. নফল ছালাত আদায় করা :

বালা-মুছীবত আসলে নফল ছালাত আদায় করে আল্লাহর কাছে তা থেকে রক্ষার জন্য দো‘আ করতে হবে। রাসূল (ছাঃ) বলেন
,إِنَّ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ لاَ يَخْسِفَانِ لِمَوْتِ أَحَدٍ وَلاَ لِحَيَاتِهِ، وَلَكِنَّهُمَا آيَتَانِ مِنْ آيَاتِ اللهِ يُرِيهِمَا عِبَادَهُ، فَإِذَا رَأَيْتُمْ ذَلِكَ فَافْزَعُوْا إِلَى الصَّلاَةِ،
‘সূর্যগ্রহণ ও চন্দ্রগ্রহণ কারো মৃত্যু কিংবা জন্মের কারণে হয় না। বরং আল্লাহর নিদর্শন সমূহের মধ্যে এ হ’ল দু’টি নিদর্শন, যা আল্লাহ তাঁর বান্দাদের দেখিয়ে থাকেন। কাজেই যখন তোমরা তা দেখবে তখন ভীত অবস্থায় ছালাতের দিকে আসবে’।
আবূ হুরায়রাহ (রাঃ) হ’তে বর্ণিত, নবী করীম (ছাঃ) বলেন, তিনজন শিশু ব্যতীত কেউ দোলনায় থেকে কথা বলেনি। প্রথম জন ঈসা (আঃ), দ্বিতীয় জন বনী ইসরাঈলের এক ব্যক্তি যাকে জুরাইজ নামে ডাকা হ’ত। একদা ইবাদতে রত থাকা অবস্থায় তার মা এসে তাকে ডাকল। সে ভাবল আমি কি তার ডাকে সাড়া দেব, না ছালাত আদায় করতে থাকব। তার মা বলল, হে আল্লাহ! ব্যাভিচারিণীর মুখ না দেখা পর্যন্ত তুমি তাকে মৃত্যু দিও না। জুরাইজ তার ইবাদতখানায় থাকত। একবার তার নিকট এক মহিলা আসল। তার সঙ্গে কথা বলল। কিন্তু জুরাইজ তা অস্বীকার করল। অতঃপর মহিলা একজন রাখালের নিকট গেল এবং তাকে দিয়ে মনোবাসনা পূর্ণ করল। পরে সে একটি পুত্র সন্তান প্রসব করল। তাকে জিজ্ঞেস করা হ’ল এটি কার থেকে? মহিলা বলল, জুরাইজ থেকে। লোকেরা তার নিকট আসল এবং তার ইবাদতখানা ভেঙ্গে দিল। আর তাকে নীচে নামিয়ে আনল ও তাকে গালি-গালাজ করল। তখন জুরাইজ ওযূ করে ছালাত আদায় করল। অতঃপর নবজাত শিশুটির নিকট এসে তাকে জিজ্ঞেস করল হে শিশু! তোমার পিতা কে? সে জবাব দিল, ঐ রাখাল। তারা বলল, আমরা আপনার ইবাদতখানাটি সোনা দিয়ে তৈরি করে দিচ্ছি। সে বলল, না, তবে মাটি দিয়ে’।
আবূ হুরায়রাহ (রাঃ) হ’তে বর্ণিত তিনি বলেন, নবী করীম (ছাঃ) বলেছেন, ইবরাহীম (আঃ) সারাকে সঙ্গে নিয়ে হিজরত করলেন এবং এমন এক জনপদে প্রবেশ করলেন, যেখানে এক বাদশাহ ছিল, অথবা বললেন, এক অত্যাচারী শাসক ছিল। তাকে বলা হ’ল যে, ইবরাহীম (নামক এক ব্যক্তি) এক পরমা সুন্দরী নারীকে নিয়ে (আমাদের এখানে) প্রবেশ করেছে। সে তখন তাঁর নিকট লোক পাঠিয়ে জিজ্ঞেস করল, হে ইবরাহীম! তোমার সঙ্গে এ নারী কে? তিনি বললেন, আমার বোন। অতঃপর তিনি সারার নিকট ফিরে এসে বললেন, তুমি আমার কথা মিথ্যা মনে করো না। আমি তাদেরকে বলেছি যে, তুমি আমার বোন। আল্লাহর শপথ! দুনিয়াতে (এখন) তুমি আর আমি ব্যতীত আর কেউ মুমিন নেই। সুতরাং আমি ও তুমি দ্বীনী ভাই-বোন। এরপর ইবরাহীম (আঃ) (বাদশাহর নির্দেশে) সারাকে বাদশাহর নিকট পাঠিয়ে দিলেন। বাদশাহ তাঁর দিকে অগ্রসর হ’ল।
সারা ওযূ করে ছালাতে দাঁড়িয়ে গেলেন এবং এ দো‘আ করলেন, হে আল্লাহ! আমি তোমার উপর এবং তোমার রাসূলের উপর ঈমান এনেছি এবং আমার স্বামী ব্যতীত সকল হ’তে আমার লজ্জাস্থান সংরক্ষণ করেছি। তুমি এই কাফেরকে আমার উপর ক্ষমতা দিও না। তখন বাদশাহ বেহুঁশ হয়ে পড়ে মাটিতে পায়ের আঘাত করতে লাগলো। তখন সারা বললেন, হে আল্লাহ! এ অবস্থায় যদি সে মারা যায় তবে লোকেরা বলবে, মহিলাটি একে হত্যা করেছে। তখন সে জ্ঞান ফিরে পেল। এভাবে দু’বার বা তিনবারের পর বাদশাহ বলল, আল্লাহর শপথ! তোমরা তো আমার নিকট এক শয়তানকে পাঠিয়েছ। একে ইবরাহীমের নিকটে ফিরিয়ে দাও এবং তার জন্য হাজেরাকে হাদিয়া স্বরূপ দান কর।
সারাহ ইবরাহীম (আঃ)-এর নিকট ফিরে এসে বললেন, আপনি জানেন কি, আল্লাহ তা‘আলা কাফেরকে লজ্জিত ও নিরাশ করেছেন এবং সে এক বাঁদীকে হাদিয়া হিসাবে দিয়েছে?

🕋 খ. তাহাজ্জুদ ছালাত আদায় করা :

আবূ উমামা (রাঃ) রাসূলুল্লাহ (ছাঃ) হ’তে বর্ণনা করেছেন। তিনি বলেছেন,
عَلَيْكُمْ بِقِيَامِ اللَّيْلِ فَإِنَّهُ دَأْبُ الصَّالِحِيْنَ قَبْلَكُمْ وَهُوَ قُرْبَةٌ إِلَى رَبِّكُمْ وَمَكْفَرَةٌ لِلسَّيِّئَاتِ وَمَنْهَاةٌ لِلإِثْمِ.
‘তোমরা অবশ্যই রাতের ইবাদত করবে। কেননা তা তোমাদের পূর্ববর্তী সৎকর্মপরায়ণগণের অভ্যাস, আল্লাহর সান্নিধ্য অর্জনের উপায়, গুনাহসমূহের কাফফারা এবং পাপ কর্মের প্রতিবন্ধক’।
রাসূল (ছাঃ) বলেন
,يَنْزِلُ رَبُّنَا تَبَارَكَ وَتَعَالَى كُلَّ لَيْلَةٍ إِلَى السَّمَاءِ الدُّنْيَا حِينَ يَبْقَى ثُلُثُ اللَّيْلِ الآخِرُ يَقُولُ مَنْ يَدْعُونِى فَأَسْتَجِيبَ لَهُ مَنْ يَسْأَلُنِى فَأُعْطِيَهُ مَنْ يَسْتَغْفِرُنِى فَأَغْفِرَ لَهُ، ‘
আমাদের প্রতিপালক প্রত্যেক রাতেই নিকটবর্তী আকাশে (১ম আকাশে) অবতীর্ণ হন, যখন রাতের শেষ তৃতীয় ভাগ অবশিষ্ট থাকে এবং বলতে থাকেন, কে আছে যে আমাকে ডাকবে আমি তার ডাকে সাড়া দিব। কে আছে যে আমার নিকট কিছু চাইবে, আমি তাকে তা দান করব এবং কে আছে যে আমার নিকট ক্ষমা চাইবে, আমি তাকে ক্ষমা করব’।
সুতরাং এসময়ে তাহাজ্জুদ ছালাত আদায় করে আল্লাহর কাছে বালা-মুছীবত থেকে আশ্রয় প্রার্থনা করলে তিনি তা থেকে
মুক্তি দিবেন।

🕋 গ. যিকর করা :

যিকর করা আল্লাহর করুণা লাভের মাধ্যম। তাই বালা-মুছীবত আসলে বেশী বেশী আল্লাহর যিকর করার মাধ্যমে তাঁর রহমত লাভের চেষ্টা করা উচিত। যাতে তিনি সন্তুষ্ট হয়ে বান্দাকে বিপদ থেকে রক্ষা করেন। রাসূল (ছাঃ) বলেন
,إِنَّ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ آيَتَانِ مِنْ آيَاتِ اللهِ، لاَ يَخْسِفَانِ لِمَوْتِ أَحَدٍ وَلاَ لِحَيَاتِهِ، فَإِذَا رَأَيْتُمْ ذَلِكَ فَاذْكُرُوا اللهَ،
‘নিঃসন্দেহে সূর্য ও চন্দ্র আল্লাহর নিদর্শন সমূহের মধ্যে দু’টি নিদর্শন। কারো মৃত্যু বা জন্মের কারণে এ দু’টির গ্রহণ হয় না। কাজেই যখন তোমরা গ্রহণ দেখবে তখনই আল্লাহর (যিকর) স্মরণ করবে’।

🕋 ঘ. ছাদাক্বাহ করা :

জান-মালের উপরে বিপদাপদ ও আল্লাহর অসন্তোষ থেকে পরিত্রাণের অন্যতম উপায় হচ্ছে দান-ছাদাক্বাহ করা। আর অন্যের প্রতি অনুগ্রহ করা। আল্লাহ বলেন
,إِنَّ رَحْمَةَ اللهِ قَرِيْبٌ مِنَ الْمُحْسِنِيْنَ.
‘নিশ্চয়ই আল্লাহর রহমত সৎকর্মশীলদের অতীব নিকটবর্তী’ (আ‘রাফ ৭/৫৬)।
তিনি আরো বলেন
,مَا عَلَى الْمُحْسِنِيْنَ مِنْ سَبِيلٍ وَاللهُ غَفُورٌ رَحِيْمٌ،
‘বস্ত্ততঃ সৎকর্মশীলদের বিরুদ্ধে কোনরূপ অভিযোগ নেই। আর আল্লাহ ক্ষমাশীল ও দয়াবান’ (তওবা ৯/৯১)।
রাসূল (ছাঃ) বলেছেন
,إِنَّ الصَّدَقَةَ لَتُطْفِئُ عَنْ أَهْلِهَا حَرَّ الْقُبُوْرِ، وَإِنَّمَا يَسْتَظِلُّ الْمُؤْمِنُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فِيْ ظِلِّ صَدَقَتِهِ-
‘নিশ্চয়ই দান কবরের শাস্তিকে মিটিয়ে দেয় এবং ক্বিয়ামতের দিন মুমিন তার দানের ছায়াতলে ছায়া গ্রহণ করবে’।
তিনি আরো বলেন,
صَدَقَةُ السِّرِّ تُطْفِيُ غَضَبَ الرَّبِّ-
‘গোপন দান প্রতিপালকের ক্রোধকে মিটিয়ে দেয়’।
হাফেয ইবনুল ক্বায়্যিম (রহঃ) বলেন,
فإن للصدقة تأثيراً عجيباً في دفع أنواع البلاء ولو كانت من فاجر أو من ظالم بل من كافر، فإن الله تعالى يدفع بها عنه أنواعاً من البلاء، وهذا أمر معلوم عند الناس خاصتهم وعامتهم، وأهل الأرض كلهم مقرون به لأنهم جربوه.
‘দান-ছাদাক্বার অত্যাশ্চর্য প্রভাব রয়েছে বিভিন্ন প্রকার বালা-মুছীবত প্রতিরোধে। যদিও সে (দানকারী) পাপী, অত্যাচারী, এমনকি ছোট-খাট কুফরীকারী হয়। আল্লাহ তা‘আলা দানের দ্বারা দানকারী থেকে নানা ধরনের বালা-মুছীবত প্রতিহত করেন, যা নির্দিষ্ট ও অনির্দিষ্ট সকল মানুষের জানা বিষয়। দুনিয়াবাসী এর দ্বারা স্থায়ীত্ব লাভ করে। কেননা তারা তা দ্বারা পরীক্ষিত’।
হাফেয ইবনু হাজার আসক্বালানী (রহঃ) বলেন,
أَنَّ الصَّدَقَةَ تَدْفَعُ الْعَذَابَ وَأَنَّهَا قَدْ تُكَفِّرُ الذُّنُوْبَ
، ‘নিশ্চয়ই ছাদাক্বা আযাব প্রতিরোধ করে এবং তা গোনাহ মিটিয়ে দেয়’।

🕋 ২. বেশী বেশী নেক আমল বা সৎকাজ করা :

আমলে ছালেহের মাধ্যমে আপতিত বিপদাপদ থেকে রক্ষা পাওয়া যায়। রাসূল (ছাঃ) বলেছেন
,صَنَائِعُ المَعْرُوْفِ تَقِي مَصَارِعَ السُّوْءِ وَالآفَاتِ وَالْهَلَكَاتِ، وَأَهْلُ المَعْرُوْفِ فِي الدُّنْيَا هُمْ أَهْلُ الْمَعْرُوْفِ فِي الآخِرَةِ،
‘সৎকর্ম করা বালা-মুছীবত, বিপদাপদ ও ধ্বংস থেকে রক্ষার মাধ্যম। আর দুনিয়াতে যিনি সৎকর্মশীলদের অন্তর্গত, আখিরাতে তিনি সৎকর্মশীলদের অন্তর্ভুক্ত হবে’।
হাফেয ইবনুল ক্বায়্যিম (রহঃ) বলেন
,وَمِنْ أَعْظَمِ عِلَاجَاتِ الْمَرَضِ فِعْلُ الْخَيْرِ وَالْإِحْسَانِ وَالذّكْرُ وَالدّعَاءُ وَالتّضَرّعُ وَالِابْتِهَالُ إلَى اللهِ وَالتّوْبَةُ وَلِهَذِهِ الْأُمُورِ تَأْثِيْرٌ فِيْ دَفْعِ الْعِلَلِ وَحُصُوْلِ الشّفَاءِ،
‘আর রোগ থেকে আরোগ্যের বড় প্রতিষেধক হ’ল সৎকাজ করা, দান-ছাদাক্বা করা, যিকর-আযকার ও দো‘আ করা, কাকুতি-মিনতি করা এবং বিনীত হয়ে আল্লাহর কাছে তওবা করা। রোগ প্রতিরোধে এবং আরোগ্য লাভে এসব কাজের প্রভাব রয়েছে’।

🕋 ৩. আল্লাহর নিকটে বিনীতভাবে দো‘আ করা বা কাঁদা:

আযাব-গযব ও বিপদাপদ থেকে রক্ষার অন্যতম উপায় হচ্ছে আল্লাহর নিকটে বিনীতভাবে দো‘আ করা। কাকুতি-মিনতি সহকারে তাঁর নিকটে পাপ থেকে ক্ষমা চাওয়া এবং তাঁর সন্তোষ কামনা করা। তাহ’লে আল্লাহ দো‘আ কবুল করবেন এবং পাপীদেরকে ধ্বংস করবেন না। আল্লাহ বলেন,
وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا إِلَى أُمَمٍ مِنْ قَبْلِكَ فَأَخَذْنَاهُمْ بِالْبَأْسَاءِ وَالضَّرَّاءِ لَعَلَّهُمْ يَتَضَرَّعُوْنَ، فَلَوْلا إِذْ جَاءَهُمْ بَأْسُنَا تَضَرَّعُوْا وَلَكِنْ قَسَتْ قُلُوْبُهُمْ وَزَيَّنَ لَهُمُ الشَّيْطَانُ مَا كَانُوْا يَعْمَلُوْنَ،
‘আমরা তোমার পূর্বেকার সম্প্রদায় সমূহের নিকট রাসূল পাঠিয়েছিলাম। অতঃপর (তাদের অবিশ্বাসের কারণে) আমরা তাদেরকে অভাব-অনটন ও রোগ-ব্যাধি দ্বারা পাকড়াও করেছিলাম। যাতে কাকুতি-মিনতিসহ আল্লাহর প্রতি বিনীত হয়। যখন তাদের কাছে আমাদের শাস্তি এসে গেল, তখন কেন তারা বিনীত হ’ল না? বরং তাদের অন্তরসমূহ শক্ত হয়ে গেল এবং শয়তান তাদের কাজগুলিকে তাদের নিকটে সুশোভিত করে দেখালো’ (আন‘আম ৬/৪২-৪৩)।
তিনি আরো বলেন
,وَمَا أَرْسَلْنَا فِيْ قَرْيَةٍ مِنْ نَبِيٍّ إِلَّا أَخَذْنَا أَهْلَهَا بِالْبَأْسَاءِ وَالضَّرَّاءِ لَعَلَّهُمْ يَضَّرَّعُوْنَ،
‘কোন জনপদে যখন আমরা কোন নবী পাঠাই, তখন সেখানকার অধিবাসীদেরকে (পরীক্ষা করার জন্য) নানাবিধ কষ্ট ও বিপদে আক্রান্ত করি। যাতে তারা অনুগত হয়’ (আ‘রাফ ৭/৯৪)।
রাসূল (ছাঃ) বলেন
,إِنَّ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ آيَتَانِ مِنْ آيَاتِ اللهِ، وَإِنَّهُمَا لاَ يَخْسِفَانِ لِمَوْتِ أَحَدٍ، وَإِذَا كَانَ ذَاكَ فَصَلُّوْا وَادْعُوْا حَتَّى يُكْشَفَ مَا بِكُمْ.
‘সূর্য ও চন্দ্র আল্লাহর নিদর্শন সমূহের মধ্যে দু’টি নিদর্শন। কারো মৃত্যুর কারণে এ দু’টোর গ্রহণ হয় না। কাজেই যখন গ্রহণ হবে, তা মুক্ত না হওয়া পর্যন্ত ছালাত আদায় করবে এবং দো‘আ করতে থাকবে। এ কথা নবী করীম (ছাঃ) এ কারণেই বলেছেন যে, সেদিন তাঁর পুত্র ইবরাহীম (রাঃ)-এর মৃত্যু হয়েছিল এবং লোকেরা সে ব্যাপারে পরস্পর বলাবলি করছিল’।
বালা-মুছীবত থেকে পরিত্রাণের জন্য নিম্নোক্ত দো‘আগুলো পড়া যায়।

ক. দো‘আ ইউনুস পড়া : রাসূল (ছাঃ) বলেন,

ألاَ أُخْبِرُكمْ بِشَيْءٍ إذَا نَزَلَ بِرَجُلٍ مِنْكمْ كَرْبٌ أوْ بَلاءٌ مِنْ أمْرِ الدُّنْيا دَعَا بِهِ فَفُرِّجَ عَنْهُ دُعَاءُ ذِيْ النُّوْنِ لاَ إِلَهَ إِلاَّ أنْتَ سُبْحَانَكَ إنِّّيْ كُنْتُ مِنَ الظَّالِمِيْنَ،
‘আমি তোমাদেরকে এমন কোন বিষয়ের সংবাদ দিব যে, তোমাদের কারো উপরে যখন দুনিয়াবী কোন কষ্ট-ক্লেশ অথবা বালা-মুছীবত নাযিল হয়, তখন তার মাধ্যমে দো‘আ করলে তা দূরীভূত হয়। তাহ’ল মাছ ওয়ালা ইউনুস (আঃ)-এর দো‘আ- ‘লা ইলা-হা ইল্লা আনতা সুবহা-নাক ইন্নী কুনতু মিনায যলেমীন’।

খ.

اللَّهُمَّ إِنِّى أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْبَرَصِ وَالْجُنُونِ وَالْجُذَامِ وَمِنْ سَيِّئِ الأَسْقَامِ
‘আল্ল-হুম্মা ইন্নী আ‘ঊযুবিকা মিনাল বারাছি ওয়াল জুনূনি ওয়াল জুযা-মি ওয়া মিন সাইয়িইল আসক্বা-ম’। (হে আল্লাহ! আমি আপনার কাছে আশ্রয় চাই শ্বেতরোগ, মস্তিষ্ক বিকৃতি, কুষ্ঠ এবং সব ধরনের দুরারোগ্য ব্যাধি হ’তে)।

গ.

أَعُوْذُ بِكَلِمَاتِ اللهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ
‘আ‘ঊযু বিকালিমা-তিল্লা-হিত তাম্মা-তি মিন শার্রি মা খালাক্ব’ (আমি আল্লাহর পরিপূর্ণ কালেমা সমূহের মাধ্যমে তাঁর সৃষ্টির যাবতীয় অনিষ্টকারিতা হ’তে পানাহ চাচ্ছি)।

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